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झुंझुनूं में वक्फ संपत्तियों से हटेंगे 339 अवैध कब्जे

हाईकोर्ट के आदेश पर तीन हफ्ते में चलेगा बुलडोजर

झुंझुनूं (राजस्थान):
राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद झुंझुनूं जिले में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर हुए 339 अवैध अतिक्रमणों को हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। कोर्ट ने प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

यह मामला हजरत कमरुद्दीन शाह दरगाह से जुड़ी वक्फ भूमि का है, जहां लंबे समय से अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आ रही थीं। जांच में सामने आया कि कब्जाधारियों के पास किसी भी प्रकार के वैध दस्तावेज मौजूद नहीं हैं

हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन और वक्फ बोर्ड हरकत में आ गया है। जल्द ही बुलडोजर कार्रवाई के जरिए अतिक्रमण हटाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कानून के दायरे में और पारदर्शी तरीके से की जाएगी।

यह फैसला वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और अवैध कब्जों पर रोक लगाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

गृह विभाग का नया आदेश: दो लाख से अधिक नकद लेन-देन पर अब पुलिस देगी आयकर विभाग को सूचना

जुलाई 31, 2025 | By Jhalko Jhunjhunu

राजस्थानअगर अब पुलिस थाने में कोई ऐसा मामला सामने आता है जिसमें दो लाख रुपए या उससे अधिक का नकद लेन-देन शामिल है, तो संबंधित थानाधिकारी को इसकी सूचना आयकर विभाग को देना अनिवार्य होगा।

राजस्थान गृह विभाग ने इस संबंध में नया परिपत्र जारी कर पुलिस महानिदेशक (DGP) और सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। गृह सचिव (विधि) रवि शर्मा द्वारा जारी किए गए इस आदेश का उद्देश्य नकद लेन-देन में पारदर्शिता लाना और कर चोरी की संभावनाओं पर नियंत्रण करना है।

 

किन मामलों में देनी होगी सूचना?

गृह विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार:

  • यदि अचल संपत्ति की खरीद-फरोख्त, किसी प्रकार का लिखित करार, या कोई अन्य मामला जिसमें ₹2 लाख या उससे अधिक का नकद लेन-देन शामिल हो, सामने आता है।
  • ऐसे मामलों में थानाधिकारी को संबंधित नोडल आयकर अधिकारी को तत्काल सूचना देनी होगी।

 

सिविल विवादों में पुलिस नहीं करेगी आपराधिक कार्रवाई

परिपत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कोई सिविल विवाद (जैसे ठेका, करार आदि) पुलिस के पास पहुंचता है, तो पुलिस सीधा आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं करेगी

  • ऐसे मामलों में पहले 7 दिन के भीतर प्रारंभिक जांच की जाएगी।
  • किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस उपायुक्त (DCP) से स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा।

 

उच्च न्यायालय की टिप्पणी

राजस्थान हाईकोर्ट ने 21 मई 2025 को एक मामले की सुनवाई के दौरान चिंता जताई थी कि सिविल प्रकरणों में भी पुलिस द्वारा कार्रवाई की जा रही है, जो उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सिविल विवादों में फौजदारी का रंग नहीं चढ़ाया जाना चाहिए

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी निर्देश दे चुका है कि यदि ₹2 लाख या उससे अधिक नकद लेन-देन का मामला सामने आए, तो आयकर विभाग को तत्काल जानकारी दी जाए, और आयकर अधिकारी उसे गंभीरता से लें

यह आदेश न केवल पुलिस प्रशासन के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करता है, बल्कि सामान्य नागरिकों को भी सजग रहने की आवश्यकता है। दो लाख से अधिक नकद लेन-देन करने पर यदि मामला थाने तक पहुंचता है, तो वह अब आयकर विभाग की निगरानी में भी आ सकता है

राज्य सरकार की यह पहल कर चोरी रोकने और सिविल व आपराधिक मामलों के बीच अंतर स्पष्ट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।