देश में बड़ी संख्या में लोग लाखों रुपये की कार तो खरीदते हैं, लेकिन मोटर बीमा के नाम पर कंजूसी कर जाते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 50% वाहन बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि हादसे की स्थिति में भारी आर्थिक नुकसान का कारण भी बन सकता है। इंश्योरेंस न होने पर किसी दुर्घटना में थर्ड पार्टी को हर्जाना खुद वाहन मालिक को अपनी जेब से देना पड़ता है।
मोटर बीमा न होने पर लगेगा भारी जुर्माना
केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव की तैयारी कर रही
है ताकि सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, बिना बीमा
वाहन चलाने पर पहली बार इंश्योरेंस के बेस प्रीमियम का तीन गुना जुर्माना लगाया
जाएगा। यदि वही व्यक्ति दोबारा बिना बीमा पकड़ा जाता है, तो
यह जुर्माना पांच गुना तक हो सकता है। फिलहाल ऐसे मामलों में पहली बार ₹2000
और दूसरी बार ₹4000 का जुर्माना लगता है। नए
नियमों को कैबिनेट की मंजूरी के बाद पूरे देश में लागू किया जाएगा।
स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी हो सकती है और महंगी
स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत को देखते हुए इंश्योरेंस
कंपनियाँ भी पॉलिसियों की प्रीमियम दरें बढ़ाने की योजना बना रही हैं। निवा बूपा
हेल्थ इंश्योरेंस वित्त वर्ष 2025-26 में अपने बीमा उत्पादों के प्रीमियम
में 8 से 9 प्रतिशत तक वृद्धि कर सकती
है। कंपनी के सीएफओ ने बताया कि यह वृद्धि उत्पाद चक्र और लागत पर निर्भर करेगी।
स्टार हेल्थ इंश्योरेंस भी ऐसी योजना पर काम कर रही है, जिसमें
ग्राहकों को छूट आधारित मूल्य मॉडल मिलेगा। इसका लाभ उन्हें मिलेगा जिनका हेल्थ
रिकॉर्ड अच्छा है या जिन्होंने क्लेम नहीं किया है। वर्ष 2025 में चिकित्सा महंगाई दर 13% तक बढ़ने का अनुमान है,
जिससे अन्य कंपनियाँ भी प्रीमियम दरें बढ़ा सकती हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस के नियमों में भी होगा बदलाव
सड़क पर अनुशासन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए
ड्राइविंग लाइसेंस नियमों में भी संशोधन किया जा रहा है। यदि कोई व्यक्ति तेज गति
से वाहन चलाता है या शराब पीकर गाड़ी चलाने का दोषी पाया जाता है, तो लाइसेंस
रिन्यूअल के समय उसे फिर से ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। साथ ही 55 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए भी रिन्यूअल प्रक्रिया में ड्राइविंग
टेस्ट अनिवार्य किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे सुरक्षित ढंग से वाहन
चला सकते हैं या नहीं।