एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) आज पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर और खामोश महामारी बन चुका है। यह समस्या तब पैदा होती है जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, जिससे एंटीबायोटिक और अन्य दवाएं बेअसर हो जाती हैं। इस ब्लॉग में हम सरल भाषा में AMR के खतरे, भारत की स्थिति और भारत सरकार द्वारा बनाए गए 2025-2029 के मेगा एक्शन प्लान को विस्तार से समझेंगे।
AMR क्या है? आसान शब्दों में समझें
जब हम बिना जरूरत या गलत तरीके से एंटीबायोटिक दवाएं लेते हैं, तो बैक्टीरिया उनसे लड़ना सीख जाते हैं। धीरे-धीरे वही दवाएं काम करना बंद कर देती हैं। यही स्थिति एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस कहलाती है।
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना
- पूरा कोर्स पूरा न करना
- जानवरों में जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक का इस्तेमाल
दुनिया के लिए कितना बड़ा खतरा है AMR?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य वैश्विक रिपोर्ट्स के अनुसार, AMR आने वाले समय में इंसानियत के लिए सबसे बड़ा संकट बन सकता है। यह एक ऐसी बीमारी है जो दिखती नहीं, लेकिन अंदर ही अंदर लाखों जानें ले रही है।
- 2050 तक हर साल करीब 1 करोड़ लोगों की मौत का खतरा
- 2021 में ही 47 लाख मौतें AMR से जुड़ी
- WHO (2025) के अनुसार हर 6 में से 1 संक्रमण पर दवाएं असर नहीं कर रहीं
भारत में AMR की स्थिति: क्यों ज्यादा गंभीर?
भारत में AMR की समस्या और भी गंभीर है क्योंकि यहां एंटीबायोटिक दवाएं आसानी से मिल जाती हैं। लोग छोटी बीमारियों में भी बिना जांच के दवाएं ले लेते हैं।
- 83% मरीजों में रेजिस्टेंट बैक्टीरिया पाए जा रहे हैं
- अमेरिका में यह दर केवल 20.1%
- सामान्य इलाज जहां 70 हजार में होता है, AMR मरीज पर 5 लाख रुपये तक खर्च
इंसान, पशु और पर्यावरण – तीनों पर खतरा
AMR केवल इंसानों की समस्या नहीं है। जानवरों को तेजी से बढ़ाने के लिए दी जाने वाली एंटीबायोटिक और उनका मलमूत्र पानी और मिट्टी में मिलकर पर्यावरण को भी जहरीला बना रहा है।
हिमाचल प्रदेश जैसे फार्मा हब क्षेत्रों में नदियों के पानी में एंटीबायोटिक के अंश पाए गए हैं, जो भविष्य में और बड़े खतरे को जन्म दे सकते हैं।
भारत सरकार का मेगा एक्शन प्लान (2025-2029)
भारत सरकार ने AMR से निपटने के लिए 20 मंत्रालयों के सहयोग से 5 साल का राष्ट्रीय मेगा एक्शन प्लान तैयार किया है। इसका मकसद "One Health Approach" के तहत इंसान, पशु और पर्यावरण – तीनों को सुरक्षित रखना है।
मेगा प्लान के 6 मुख्य उद्देश्य
- जागरूकता: आम जनता, डॉक्टर और फार्मासिस्ट को AMR के प्रति शिक्षित करना
- निगरानी: लैब नेटवर्क मजबूत करना और संक्रमण की निगरानी
- रोकथाम: स्वच्छता और टीकाकरण से बीमारियों को रोकना
- सही उपयोग: एंटीबायोटिक का विवेकपूर्ण इस्तेमाल
- रिसर्च: नई दवाओं और तकनीक पर शोध
- सुरक्षित दवा: गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित दवाओं को बढ़ावा
आम नागरिक क्या कर सकते हैं?
सरकार के साथ-साथ आम लोगों की जिम्मेदारी भी बहुत बड़ी है। छोटे-छोटे कदम इस खामोश महामारी को रोक सकते हैं।
- बिना डॉक्टर की सलाह दवा न लें
- एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स पूरा करें
- बीमारी में खुद से दवा न बदलें
- स्वच्छता और टीकाकरण पर ध्यान दें
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक साइलेंट पैंडेमिक है, जो धीरे-धीरे हमारे भविष्य को खोखला कर रही है। भारत सरकार का मेगा प्लान एक मजबूत कदम है, लेकिन इसकी सफलता जनता की समझ और सहयोग पर निर्भर करती है। आज लिया गया सही फैसला आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी बचा सकता है।